India News (इंडिया न्यूज), Sheikh Hasina: बांग्लादेश में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद देश छोड़कर भारत में शरण ली हुई पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की टेंशन बढ़ गई है। दरअसल बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने ऐसा कदम उठाया है कि उनकी मुश्किल बढ़ सकती है और उनको भारत छोड़कर बांग्लादेश जाना पड़ सकता है। शेख हसीना के खिलाफ इंटरनेशनल क्राइम ट्रीब्यूनल (बांग्लादेश) ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। उनके खिलाफ यह ट्रिब्यूनल इसी साल के छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा और नरसंहार को लेकर गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट ने उनको 18 नवंबर को पेशी का आदेश दिया है।
इस वजह से शेख हसीना को छोड़ना पड़ा था बांग्लादेश
हम आपको जानकारी के लिए बता दें कि, शेख हसीना सरकार को नौकरियों में आरक्षण को लेकर छात्रों के भयंकर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा था। जिसकी वजह से उन्हें इस उग्र प्रदर्शन की वजह से (5 अगस्त, 2024) को देश छोड़कर भागना पड़ा था। अब इस मामले में अभियोजन पक्ष ने हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के खिलाफ छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हत्याओं में कथित रूप से शामिल 50 अन्य लोगों के खिलाफ भी गिरफ्तारी वारंट का अनुरोध किया है।
ट्रिब्यूनल को मिली कितनी शिकायतें
जानकारी के अनुसार ट्रिब्यूनल को अब तक निर्वासित नेता और उनकी अवामी लीग के सहयोगियों के खिलाफ जबरन गायब करने, हत्या और सामूहिक हत्याओं की 60 शिकायतें मिल चुकी हैं। हसीना के 15 साल के शासन में काफी बड़ी संख्या में मानवाधिकारों के हनन का मामला देखने को मिला था। इन मामलों में उनके राजनीतिक विरोधियों को बड़े पैमाने पर हिरासत में लेना और उनकी हत्याएं शामिल हैं। हम आपको जानकारी के लिए बता दें कि, अगस्त में ही हसीना के प्रत्यर्पण की मांग ने जोर पकड़ लिया था। दरअसल बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने मुकदमा चलाने के लिए भारत से कई मौकों पर शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की थी। अब ये देखने वाली बात होगी कि, इंटरनेशनल क्राइम ट्रीब्यूनल (बांग्लादेश) के हसीना के गिरफ्तारी वारंट और केस चलाने के आदेश पर भारत या फिर बांग्लादेश क्या फैसला लेती है।